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यादें रोज़ ताज़ा होती हैं

                
                                                         
                            वो पल जो उसके पास गुज़रे थे
                                                                 
                            
उन पलों की यादें रोज़ ताज़ा होती हैं
ज़ख्मों को भी ताज़ा कर जाती हैं
कभी रंक तो कभी राजा के जाती हैं
दीवाना था उसकी खताओं की
वो खुशबू थी इन हवाओं की
वो मंज़िल थी सभी दिशाओं की
मुस्कान थी वो इन फिज़ाओं की

Harikesh Yadav BHU


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6 वर्ष पहले

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