स्पर्श तुम्हारी बाहों का
अब ख़्वाब- सा लगता है
चुम्बन तुम्हारे होठों का
अब आकाश- सा लगता है
फ़िर भी कुछ कहने को दिल करता है -
दुपट्टा तुम्हारा अब तुम्हारे स्तन की बात नहीं करता
शायद वो भी आधुनिक हो गया हो
अब तुम कहना कि तुम्हारी मर्ज़ी है
की तुम्हें क्या पहनना है ?
हां ज़रूर , क्यों नहीं तुमने जो नारी विमर्श का विज्ञान पढ़ लिया है ।
विज्ञान जगत में प्यार का एहसास कहां ,?
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