साहित्य में तेरा प्यार लिखा
भूगोल और इतिहास से परे ।
तेरे यौवन का शब्दों से श्रृंगार लिखा
हास्य और उपहास से परे ।
काव्यधारा में तेरी काया को अलंकृत लिखा
तर्क और संवाद से परे ।
व्याकरण सम्मत तेरे अंगो की बनावट लिखा
भग्न और विषाद से परे ।
तेरी वाणी में सात सुरों का व्यवहार लिखा
मरण और अमरता के त्योहार परे ।
हरिकेश यादव , काशी हिंदू विश्वविद्यालय , वाराणसी ।
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