आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रयागराज

                
                                                         
                            मैं शहर प्रयागराज हूं
                                                                 
                            
शिक्षा की सदियाेेें से आवाज़ हूं
राजनीति की बयार हूं
बेरोजगारों का व्यापार हूं
मैं गंगा, यमुना और सरस्वती के तट पर अवस्थित हूं
संगम के रूप में इतिहास में व्यवस्थित हूं
मैं बेरोजगारों में लोकप्रिय हूं
पुराणों की संस्कृति हूं
नौजवानों की धड़कन हूं
वृद्धों की जकड़न हूं ।
मैं मां- बाप की उम्मीद हूं
सफलता, असफलता का मुरीद हूं
मैं एक तीर्थ स्थल हूं
मैं निर्मल हूं
मैं शहर प्रयागराज हूं
मैं शहर इलाहाबाद हूं


हरिकेश यादव,बी.एच.यू.


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर