मैं बी ए का छात्र हूं
क्या मैं उसके प्यार का पात्र हूं?
मेरा बी ए में इतिहास है
क्या उसको मेरे प्यार पर विश्वास है ?
मैं बी ए का छात्र हूं
क्या उसके प्यार का पात्र हूं?
प्राचीन इतिहास में मैं प्रवीण हूं
क्या प्यार में मैं नवीन हूं?
मैं बी ए का छात्र हूं
क्या उसके प्यार का पात्र हूं?
उसके होठों पर बिखरी है मधुशाला
क्या मैं पी लूं दो चार प्याला?
लिखने का न आदी हूं
क्या मैं उसके प्यार की तलाशी हूं?
मैं बी ए का छात्र हूं
क्या मैं उसके प्यार का पात्र हूं?
गांव एक छोरा हूं मैं
कुछ काला कुछ गोरा हूं मैं
वह शहर की है एक छोरी
पर पूरी की पूरी गोरी है
मैं बी ए का छात्र हूं
क्या उसके प्यार का पात्र हूं?
हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X