आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

क्योंकि वो उस पार रहती है

                
                                                         
                            मेरे सवालों के अब जवाब नहीं आते
                                                                 
                            
क्योंकि वो उस पार रहती है
मेरे दिल से अब जज़्बात नहीं निकलते
क्योंकि वो अब वो कुछ नहीं कहती
मेरे गीतों में अब सुर साज नहीं निकलते
क्योंकि वो अब मेरे साथ नहीं रहती
मेरी मजबूरियों को उसने मेरी खता समझ ली
किसी के गुरूर को उसने उसकी वफा समझ ली

हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर