ये तेरे ज़माने वाले मुझे तेरा नाम नहीं लेने देते
ये तेरे ज़माने वाले मुझे तुझे याद नहीं करने देते
और मेरी तनहाइयां तुझे भूलने नहीं देती हैं
मेरे इस दर्द की कश्मकश को
तेरे सिवा समझे कौन?
हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी
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