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गड्ढा

                
                                                         
                            मैं गड्ढा हूं
                                                                 
                            
मेरी क़िस्मत मैं ख़ुद नहीं हूं
लोगों को मैं ख़ूब दुःख देता हूं
कभी कोई मुझमें गिर जाए तो
मुझे ही लोग गालियां देते हैं
मुझे ही लोग तालियां भी देते हैं
राजनीति के लोग मेरे अस्तित्व को नष्ट करने की बात करते हैं
सब लोग मुझसे नफ़रत करते हैं
पर ऐ वक़्त !
मैं अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा

हरिकेश यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी


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6 वर्ष पहले

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