मैं शहर आजमगढ़ हूं
मैं तमसा के तट पर हूं
मैं शहर आजमगढ़ हूं
मैं सियासतदानों के लिए चुनावी रण हूं
भारत मां ने मुझे साजाया है
आजम खां ने मुझे बसाया है
मैं शहर आजमगढ़ हूं
कभी शिक्षाविद् तो कभी अनपढ़ हूं
मैं कैफे आज़मी की नज़्म हूं
मैं इश्क़ के गीत ग़ज़ल की बज़्म हूं
मेरा अभिमान यात्रासाहित्य के पितामह राहुल सांकृत्यायन हैं
यहां तमसा की अविरल जलधाराएं गंगा सी पावन हैं
मैं शहर आजमगढ़ हूं
मैं सुख -शांति का दर्पण हूं
मैं अखिलेश -मुलायम की जीत हूं
मैं हर शायर का गीत हूं
मैं स्वभाव से ही विद्रोही हूं
मैं प्रगति पथ पर अग्रसर होकर अम्बर को छूने वाला अश्वारोही हूं
मैं शहर आजमगढ़ हूं
मैं हर ख़ुशी की जड़ हूं
हरिकेश यादव बी एच यू
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