सुख दुःख के जंजाल में जीवन सिमट- सिमट गया
राग और कभी त्याग में अहंकार अकड़- अकड़ गया
मोह ममता कामना लोभ संग क्षोभ का तूफान उठा
जिन्दगी का लक्ष्य था वही हर बार बिगड़-बिगड़ गया...
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