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आजादी की शुभकामना अनंत

                
                                                         
                            आजादी का जश्न मनाने,
                                                                 
                            
निकल पड़ी हैं टोलियां।
बच्चे, बूढ़े और जवान बोलें,
गगनभेदी जय हिन्द बोलियां।
बायें हाथ में है झंडा उनके,
माथे पर हैं सिंदूरी रोलियां।
भाव उनके चेहरे का गर्वित।
बंधुत्व बना हमजोलियां ।।

जिस आजादी को पाने को,
झेले दीवाने भूख प्यास गोलियां।
फांसी का फंदा पड़ा गले में,
फिर भी करते रहे ठिठोलियां।
खौफ मृत्यु का डिगा न पाया,
दीवानों ने भर दी झोलियां।
आज उसी का जश्न मनाने,
हम बना रहे हैं रंगोलियां।।

करें यत्न हम सब मिलकर,
धरती पर सब रहें स्वतंत्र।
सभी खुली हवा में लें सांसें,
बीच बाधा बने न कोई तंत्र।
जल जंगल और जमीन सब,
सबके बने रहें बराबर कंत ।
हक मारी करे न कोई भाई,
सब निर्द्वंद घूमें जैसे संत।

बनी रहे बोलने की आजादी,
किसी की समानता न हो हंत।
कोई करे किसी का शोषण यदि,
तो उस पर हो कार्यवाही तुरंत।
पूजा पद्धति सबकी अपनी मर्जी,
न किसी पर थोपें कोई मंत।
शक शुबहा पर बने न कोई बंदी,
आजादी की शुभकामना अनंत।।
- हरी राम यादव
 
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एक वर्ष पहले

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