है रहमदिल तुम रहम करो,
तेरी रहम के हम पुजारी है।
तेरी ही रहम पर टिकी हुई ,
देखो यह दुनिया सारी है।।
जब से मैने होश संभाला है
तेरा हर पल गुणगान किया।
मेरी हर सांस का मालिक तू,
तेरा हरदम ही सम्मान किया।।
तुझे पलको पर बिठाया है,
तेरी हर बात का मान रखा।
तेरी यादों के सपने संजोये,
तुझ पर ही अभिमान रखा।।
धरती पर सबका रखवाला,
तेरा हर और बोल बाला है।
तेरा रूप अनोखा है प्रभु जी,
तू अलग सबसे मतवाला है।
तुमने धरती का श्रृंगार किया,
अपने अश्रु से इसे ही सींचा है।
तुमने खुले हाथ दान दिया प्रभू,
कभी हाथ नही प्रभु खींच है।।
है मालिक तेरे ही सदा गुण गाऊ
सदा तेरी ही शरण मे ही पड़ा रहू।
मेरे सब दुख अब हर लो प्रभु जी,
अब किससे और में अब क्या कहूँ।।
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