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गांव गया था गांव में जागा ।

                
                                                         
                            काटे मच्छर
                                                                 
                            
रात भर जागा
कीचड़ युक्त
सड़क से भागा
गांव गया था
गांव में जागा।
खेत नहीं था
अभी भी खाली
पानी में डूबी
धान की बाली
डांट रही मेरी
घर वाली
हंसिया लेकर
खेत में पहुंचा
सड़ा धान बचा
था आधा
गांव गया था
गांव में जागा
रहा मैं शहरों
का वासी
देखा नहीं था
कभी उदासी
गांव गोल
गंभीर हुए थे
फट गए फौलादी
चोले
मरी संवेदना
सबकी पाया
नहीं रहा
कुछ दृढ
इरादा
गांव गया था
गांव में जागा ।
बुढवा पीपल
अभी बचा था सूखी डाली से
सजा था
मैं खेला था
यहीं पर कंचा
घूम रहे लोग
लिए तमंचा
गांव की ऐसी
हालत देखा
मिटी नहीं है
तम की रेखा
हर कदम पर
मिलता धोखा
टूट गया
रिश्ते का धागा
गांव गया था
गांव में जागा ।
 
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22 घंटे पहले

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