तू ही मेरी जान है और, तू ही मेरा संसार।
छूट नहीं सकता कभी,साथ हमारा यार।।
अमर रहेगा धरती पर, यह हमारा प्यार।
नगमें लिखेगा प्यार के, हम पर यह संसार।।
हमारा साथ और यह प्यार।
नहीं टूटेगा, कभी मेरे यार।।
आये कितने भी दुःख हम पर।
होगा कमजोर नहीं, यह प्यार।।
हमारा साथ और --------------।।
मुझको प्यारा है जान से तू।
मेरा है ख्वाब, ईमान से तू।।
अधूरा हूँ मैं, तुम्हारे बिना।
मेरी दुनिया - जान है तू।।
जुदा कभी, हम नहीं होंगे।
बन्धन अटूट है, अपना यार।।
हमारा साथ और --------------।।
मेरी चाहत - खुशी है तू।
मेरे लबों की, हंसी है तू।।
तेरे बिन, नहीं मेरी हस्ती।
मेरा सम्मान-नसीब है तू।।
मंजूर नहीं, दूर तुमसे रहना।
अमर रिश्ता है, अपना यार।।
हमारा साथ और ---------------।।
लगेगी चोट , जब भी तुझको।
आयेंगे आँसू , यार मुझको।।
दे दूंगा जान मैं, तुझ पर।
झुकने नहीं दूंगा, मैं मुझको।।
करेगी हमको, याद दुनिया।
लिखेगी नगमें, हम पर यार।।
हमारा साथ और ------------------।।
-गुरुदीन वर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X