एक इनको देखो, कैसे ये मौज उड़ा रहे हैं।
एक इनको देखो, कैसे ये भूखे सो रहे हैं।।
एक इनको देखो, कैसे ये महलों में रह रहे हैं।
एक इनको देखो, कैसे ये मिट्टी में सो रहे हैं।।
एक इनको देखो------------------------।।
महफिलें सजती हैं, मजलिसें जमती हैं।
योजनायें बनती हैं, किताबें छपती हैं।।
और इनको देखो, कैसे ये नारें लगा रहे हैं।
एक इनको देखो, कैसे ये आँसू बहा रहे हैं।।
एक इनको देखो------------------------।।
परहित की बातें करते हैं, घर अपना ये भरते हैं।
कानून बनाने वाले ही, इंसाफ को बेचा करते हैं।।
और इनको देखो, कैसे ये दौलत कमा रहे हैं।
एक इनको देखो, कैसे ये ईमान बेच रहे हैं।।
एक इनको देखो---------------------।।
यह बाप है, यह बेटा है, बेटे की रंगत देखो।
भीख मांग रहा है बाप, और माँ की इज्जत देखो।।
हाँ, देखों इन बेटों को, कर्ज कैसे चुका रहे हैं।
बुढ़ापे में माँ- बाप को, कैसे ये ठोकर मार रहे हैं।।
एक इनको देखो------------------------।।
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