स्वर्ग की सीढ़ी चढ़ गया है बंदा।
रब्ब की राह पकड़ गया है बंदा।
जीवन भर का जिक्र कर दिया।
फोटो फ्रेम में जड़ गया है बंदा।
हमे भी एक दिन जाना ही होगा।
सब से अब बिछड़ गया है बंदा।
लूटके भी जय जय कार हो रही।
हम सब को रगड़ गया है बंदा।
इसी जन्म को समझ ले सोहल।
पिछले से भी झगड़ गया है बंदा।
-गुरदीप सिंह सोहल
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