ज्ञान दीप जग में तारे, मिटे तिमिर अज्ञान।
शिक्षक दिवस मनाइयो, तजि दीजै अभिमान॥
तजि दीजै अभिमान, नमों राधाकृष्णन को।
शीश झुकाकर आज, वंदिए शिक्षक-जन को॥
कह 'गोकुल' कविराय, चलें हम सतपथ सारे।
मन में भर अनुराग, ज्ञान दीप जग में तारे॥
-गोवर्धन बिसेन 'गोकुल'
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