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पुलवामा बनाम वैलेन्टाइन

                
                                                         
                            अक्सर !
                                                                 
                            
जब भी निकला हूँ फरवरी में,
देश के हर युवा को,
आकर्षण के इस घेरे मे,
झूमा पाता हूँ।
स्मृति खोई तुम्हारी,
14-2-19 तुमको याद दिलाता हूँ।।

सुन लो भारत के युवा,
एक कहानी कहूँ।
वैलेन्टाइन में हि ,
गुजर गये बंसत,
कैसे तेरी धन्य जवानी कहूँ।।

सुमो भारत की छाती के लाल।
आकर्षण मे ही,भूले चोट कुर्बानी मां के वालों की,
क्या संतुलित है? तेरा भाल।।
बाकी जो विस्मृत कर चुके इस बात को।
हवस की चमक मे भला दिया इस काली रात को।
सून ले वो भी सारे!
तुम खूब बनालो वैलेन्टाइन,
लुटा दो!
महबूब की गलियों में,
जवानी को।
मगर याद रखो,
कोई वजूद नही
दुनिया मे,
अगर भूल गये,
पुलवामा की कहानी को।।


पुलवामा में शहीद वीरों को कोटी कोटी नमन एवं शत शत नमन!
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3 वर्ष पहले

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