मन तू बावरा
मन तू बावरा
तन का तू साज है, धन की तू आवाज है।
तन और धन दोनों पर तेरा ही तो राज है।।
मन तू बावरा...
मन से ही होती प्रीति , मन से ही होती भक्ति ।
मन का मिलन नहीं हो तो लगता जैसे खाज है।।
मन तू बावरा....
मन से ही कोई बनता संत, मन ही बनाता उसे महंत।
मन से कोई बन गया सन्यासी तो आती नहीं लाज है।।
मन तू बावरा.....
मन के किये हुआ मनमौजी, तन कर बैठा जैसे फौजी।
मन को वश में कर लिया तो 'गिरिजा' को खूब नाज है।।
मन तू बावरा
मन तू बावरा
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