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जीतिया पवनी बड भारी , करती हैं सब महतारी

                
                                                         
                            जीतिया पवनी बड भारी , करती हैं सब महतारी ।
                                                                 
                            
धिया-पूता के ठोकि सुतावै ; अपने खाये भरि थारी ।।
मिथिला के पर्व-त्यौहारों में , जीतिया पवनी है बड़ी खास ।
सब पवनी से उलट यह ; माछ-मरूआ खाय करे उपास ।।
ओठगन करती महिलाएं , झिमनी पात पर तेल-खड़ी चढ़ाए।
नहाय-खाय यमराज को मनाती ; संतान की दे उमर बढ़ाए।।
दही-चूड़ा-अमोट-केला-खीरा से , तीसरे दिन सब करतीं पारण।
'गिरिजा' कहै सुनहु सब संतति ; मातु-पिता के सब बनियौ चारण।।
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44 मिनट पहले

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