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धन हुआ तो धनी हुए......

                
                                                         
                            धन हुआ तो धनी हुए, धन पाकर हो गये धन्नासेठ।
                                                                 
                            
धन का भार बढ़ गया तो; चलने लगे हैं होकर ऐंठ।।
धन के बल पर होती भक्ति, धन से ही मिलती है शक्ति।
धन से होती ऐसी युक्ति; धनवान करता भगवान से पैठ।।
धन हुआ तो धनी हुए ...
धन से होता है गान-बजान, धन से मिलता मान-सम्मान।
धन हथिया कर छोटन भी; हो जाता है घर में सबसे जेठ।।
धन हुआ तो धनी हुए......
धन का चलता है बड़ा जोर, वैरागी को भी बना देता है चोर।
"गिरिजा" कहै सुनिए सब कोई; धन रखकर भी रहिए ठेठ।।
धन हुआ तो धनी हुए......
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2 घंटे पहले

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