जब याद मुझे तुम आते हो,
धड़कन दिल की बढ़ जाती है,
आँखों में नशा छा जाता है,
साँसों में आँच भर आती है.
ऐसे में तुम चुपके से
अधरों को मेरे छू जाते हो,
जब याद मुझे तुम आते हो !
जब याद मुझे तुम आते हो,
पलकों को बंद कर लेती हूँ,
अपने तन के पास तभी,
महसूस तुम्हें मैं करती हूँ,
मुझसे दूर नहीं हो तुम
बस यही बात समझाते हो,
जब याद मुझे तुम आते हो !
जब याद मुझे तुम आते हो,
बिन पंखों के पंछी सी मैं,
खुद को बेबस पाती हूँ,
मौन क्षितिज के पार तभी,
तुम "गीत" मुझे दिख जाते हो,
जीवन में फिर प्रीत जगाते हो,
जब याद मुझे तुम आते हो !
गीता चौधरी "गीत "
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X