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लोचा-ए-उल्फत हो गया

                
                                                         
                            ना रोज होती हैं बातें और ना होती हैं मुलाकातें
                                                                 
                            
ना ही कोई शिकवा और ना ही कोई शिकायतें
ना ही कोई सवाल और ना ही कोई जवाब
फिर भी लोचा-ए-उल्फत हो गया
दिल से दिल का कनेक्शन हो गया
टेप-रिकॉर्डर के Pause Button
की तरह ये रिलेशन हो गया
जहां छो़ड़ो वहीं से शुरू हो गया
फोन पर ही बातें घंटों होने लगी
मोबाइल भी कई बार डिसकनेक्ट हो गया
लेकिन फिर भी जज्बातों का एक्सेंज हो गया
अक्सर सोचती हूं अकेले में..
मैं कुदरत कैसे मुझ पर मेहरबान हो गई
तुम दोस्त से जान हो गई...
मेरी हंसी की पहचान हो गई
जिंदगी पहले से आसान हो गई
रिश्तों पर ऐतबार आ गया
तुम पर आज फिर से प्यार आ गया..
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2 वर्ष पहले

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