बड़ी कश्मकश में फंसी है जिंदगी
उलझनों का हिसाब नहीं और सवाल बेहिसाब है..
दिल खोजता है आज भी उन कंधों को,
जिस पर सिर रखकर रोने का मन करता है
नजरों को इंतजार आज भी उन हाथों का है,
जिन्हें थामकर, तूफानों से लड़ने का मन करता है
तुम कहां हो,
तुम हो भी या नहीं हो
कुछ भी नहीं पता मुझे
फिर भी तेरे आने का इंतजार
हर पल ये दिल करता है...
बड़ी कश्मकश में फंसी है जिंदगी
उलझनों का हिसाब नहीं और सवाल बेहिसाब है..
कतरा-कतरा, लम्हा-लम्हा
ये वक्त गुजर रहा है
फिर भी ना जाने क्यों
तुम लौट आओगे,
ये ही दिल हर बार... बार-बार कहता है
सच में ... बड़ी कश्मकश में फंसी है जिंदगी
उलझनों का हिसाब नहीं और सवाल बेहिसाब है..
मगरूर दुनिया वाले अपने चश्में से तुम्हें देखते हैं
चेहरे पर तो मुस्काते हैं
मुंह फेरते ही.
तंज कसते हैं
गैरों के बीच अपनों की तलाश हर वक्त ये दिल करता है
रिश्तों के रेगिस्तान में बरसात की उम्मीद करता है
सच में ... बड़ी कश्मकश में फंसी है जिंदगी
उलझनों का हिसाब नहीं और सवाल बेहिसाब है....।
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