जुबान तक तो आई
पर बोली न गई
कुछ अनकही बाते
आंखे बयां करती रही
मगर कोई समझ न पाया
कुछ अनकही बाते
समझने के लिए एहसास काफी था
जब कोई हमारा नहीं, तो समझे कौन
कुछ अनकही बाते
- गौरी शर्मा
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