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मित्र का संकल्प

                
                                                         
                            मित्र कहता हूं तुम्हें, हर मोड़ पर तुमको मिलूंगा
                                                                 
                            
युद्ध हो, संघर्ष हो, जीवन में या उत्कर्ष हो।
संग्राम हो, जीवन में कोई रार हो
हर पथ पर तुम्हे निश्चिंत मैं आगे मिलूंगा।
तीर हो, तलवार हो, नीति की कोई चाल हो
परोक्ष हो, प्रत्यक्ष हो
उस पथ पे साथ देने, वहीं पर तुमको मिलूंगा।
हार हो, अवसाद हो, या गहरा कोई विवाद हो
जग भले ही रूठ जाए, मैं नहीं पीछे हटूँगा
बनके तेरा हौसला, हर हाल में तुमको मिलूँगा।
काल का भी चक्र हो, या समय भी वक्र हो
घाव जो आए कोई, पहले मेरे सीने पे हो
ढाल बनकर सामने, हर वार पर तुमको मिलूँगा।
भीड़ हो, वीरान हो, या विधि का विधान हो
साँस जब तक है बची, विश्वास बन तुमको मिलूँगा
मित्र कहता हूँ तुम्हें, हर मोड़ पर तुमको मिलूँगा।
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7 महीने पहले

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