तेरा ज़िक्र तो मेरी हर शायरी की जान है,
मगर लबों पर तेरा नाम न लाना, मेरी पहचान है,
डरता हूँ कि लोग तुझ पर उंगली न उठा दें,
इसीलिए मेरे हर शेर में तू 'बेनाम' है।"
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