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अंतिम योग

                
                                                         
                            यूं ही नहीं मैं तुमसे, मिलना चाहता हूं,
                                                                 
                            
कुछ बातें हैं जो तुमसे, करना चाहता हूं।
मुझे मालूम है कि, फिर से नहीं मिल पाऊंगा,
इस हेतु तुमसे अंतिम, शब्द कहना चाहता हूं।
थी बहुत खुशियां, थी हंसी, जब तुम मेरे करीब थे,
लगता था जैसे हम ही, सबसे खुशनसीब थे।
अब विदा की घड़ी है, आँख मत करना नम,
बस एक मुस्कान तुम्हारी, साथ ले जाना चाहता हूं।
भूल जाना खता मेरी, गर दिल दुखाया हो कभी,
याद रखना बस वही, जो प्यार पाया हो कभी।
रोक लेना आंसुओं को, कसम है तुम्हें,
मैं हंसी-खुशी तुमसे, विदा लेना चाहता हूं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

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