बिन तुमसे बात किये कोई बात कहाँ होती है.
होता है दिन पर रात कहाँ होती है। .....
गुजर जाते हैं हर पल बिन झगड़ों के....
कि करें गुफ्तगू कोई मुलाक़ात कहाँ होती है...
तुमसे मिलने को तरसता था जो दिल यहाँ... .
होते हैं आँखों में आँसू वह बरसात कहाँ होती है...
चार कदम भी तू साथ मेरे चलता ही नहीं.........
चुराते हैं आंख पहले जैसी बात बेबाक कहां होती है..
मैं ही चलती हूं अक्सर तन्हा अंधेरों में...
तू रहता तो है पर तेरी उम्मीद साथ कहां होती है.
बिन तुमसे बात किये कोई बात कहाँ होती है...
होता है दिन पर रात कहाँ होती है...
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