दिए हैं जख्म तो क्या मलहम लगाना
रहने दो रुठा सा क्यों हमको मानना ...
जो गिले हैं उनको तुम्हें क्या बताना
अच्छा लगता है अब सबसे छुपाना ...
दर्द से अब हमें है जिंदगी सजाना
इन दर्द आंसुओं का है अपना खजाना....
रुला लो ए जिंदगी तुम को जितना है रुलाना
जब थक जाओगी तुम तो आकर मुझे हंसाना ...
मतलबी रिश्तों का है यह जग आशियाना
नए नकाब डाले वह चेहरा पुराना ....
पीठ पीछे हमारी गलतियों सुनाना
क्या-क्या हुनर है आप में और कुछ बताना ....
मखमली चेहरा आपका अच्छा होने का बहाना
आप कितने अच्छे हैं, छोड़िए अब दिखाना....
दिए हैं जख्म तो क्या मलहम लगाना
रहने दो रुठा सा क्यों हमको मानना....
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