आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

रहने दो

                
                                                         
                            दिए हैं जख्म तो क्या मलहम लगाना
                                                                 
                            
रहने दो रुठा सा क्यों हमको मानना ...

जो गिले हैं उनको तुम्हें क्या बताना
अच्छा लगता है अब सबसे छुपाना ...

दर्द से अब हमें है जिंदगी सजाना
इन दर्द आंसुओं का है अपना खजाना....

रुला लो ए जिंदगी तुम को जितना है रुलाना
जब थक जाओगी तुम तो आकर मुझे हंसाना ...

मतलबी रिश्तों का है यह जग आशियाना
नए नकाब डाले वह चेहरा पुराना ....

पीठ पीछे हमारी गलतियों सुनाना
क्या-क्या हुनर है आप में और कुछ बताना ....

मखमली चेहरा आपका अच्छा होने का बहाना
आप कितने अच्छे हैं, छोड़िए अब दिखाना....

दिए हैं जख्म तो क्या मलहम लगाना
रहने दो रुठा सा क्यों हमको मानना....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर