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मेरी रूह

                
                                                         
                            मेरी रूह को अपने जिस्म से
                                                                 
                            
कुछ इस तरह मिला लो,
हम रूठे नहीं है
आकर फिर भी मान लो....

अगर कभी मौत से भी
दूर चले जाएं हम,
कुछ इस तरह से खींच कर
गले से लगा लो.....

ओढ़ लो बदन को
मेरी खुशबू की चादर से,
प्यार से हमारी अपनी,
जिंदगी सजा लो.....

आओ कभी हमारे
तुम गरीब खाने में,
अमीरी के सहारे
इस गरीबी का मजा लो.....

दिल बड़ा हमारा है
यह हम नहीं कहते,
हमें छोटा ही कह के,
अपनी नज़रें हटा लो....

हम रूठे नहीं हैं आकर फिर भी मान लो
आकर फिर भी मान लो......
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2 वर्ष पहले

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