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खुशबू

                
                                                         
                            फिर लौट के आए हैं हम
                                                                 
                            
अपनी गजलों के पास
जो खत्म हो गई थी
आई लौट के वह सांस...

चंद लम्हों में अब
दीदार कहां होता है
रहो कभी आंखों में
कभी रहो दिल के पास...

तेरी खूबसूरती के किस्से
है बड़े चर्चे में
हम भी लगा बैठे हैं
तुझसे मिलने की आश...

वह आती है हवा जो
मुझको यूं छूकर
महसूस होती है मुझे
तेरी खुशबू कुछ खास ....

फिर लौट के आए हैं हम
अपनी गजलों के पास
अपनी गजलों के पास.....
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2 वर्ष पहले

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