कभी देखते अपने अंदर जो ऐब हमें दिखाते हो
अमल करते खुद भी जो कायदे हमें सिखाते हो ..
बदसलू की भरी हुई है तुम्हारे अंदर इतनी की..
बोलते हो कुछ ,कुछ और बताते हो ..
खुदा के घर सजा भी तुम्हें सख्त ही मिलेगी
जो बदन तो बदन रूह तक को मेरे सताते हो..
जो आज हमसे जलते हो जल जाओगे एक दिन
राख हो जाओगे खुद ही इस कदर जो हमें जलाते हो..
धोखेबाज तो तुम हो जो इतना दगा किया है
कितने नकाब पहने हैं तूने, जो लोगों को छकाते हो ..
तहजीब तुम्हारे अंदर होती और दिखती कुछ और है ..
बदनामियो का घर हो तुम तभी तो नजर कहां मिलाते हो ..
तुम्हारी जात ही है ऐसी दगादार वाली आदतें
इतने शरीफ नहीं हो जितना दुनिया को जताते हो ..
दुनिया को जताते हो ..
कभी देखते अपने अंदर जो ऐब हमें दिखाते हो..
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