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गुमान

                
                                                         
                            हम उनके इश्क के गुमान में
                                                                 
                            
कुछ यूं इस कदर टेढ़े थे
की मानने लगे थे कि ,
सनम वह मेरे थे......

आंख खुली तो हकीकत से
रू-ब-रू हुए
जिन्हें फूलों का समझा था
वह कांटों के बसेरे थे
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे .....

ख्वाबों की रंगीन दुनिया में
जी रहे थे हम
किस्मत में मेरी तो रात थी
किसी और के सवेरे थे
की मानने लगे थे सनम वह मेरे थे .....

दिल में कुछ और
जुबान पर कुछ और होता है
कहने को सब अपने हैं
फिर क्यों हम अकेले थे
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे ....

तेरे इश्क की रोशनी में
उड़ने लगे थे हम
आंख खुली तो देखा हमने
चारों तरफ अंधेरे थे ....
कि मानने लगे थे सनम वह मेरे थे....

तू था तो लगता था कि
हम हर कर भी जीत गए
पर वह भूल थी हमारी
और कुछ समय के फेरे थे ....
मानने लगे थे सनम वह मेरे थे ....

हमेशा मेरी ख्वाहिशें
दम तोड़ती है तेरे दामन में
रूठ जाऊं और तू हमें मना ले ....
मैं रूठ जाऊं और तू मुझे मना ले ....
यह कारोबार तेरे थे ....
यह कारोबार तेरे थे .....
यह कारोबार तेरे थे ......

हम उनके इश्क के गुमान में कुछ ....इस कदर टेढ़े थे की मानने लगे थे सनम वह मेरे थे........
सनम वह मेरे थे.....
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2 वर्ष पहले

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