मैं हिंदी भाषी हूँ
भाषा नहीं,
राष्ट्र की आत्मा,
हिंदी मेरी कहलाती है।
मेरी मातृभाषा, मेरे जीवन में,
मुख्य भूमिका निभाती है।
देश के जनमानस में
सेतु-सा मार्ग बनाती है,
भाईचारा खूब बढ़ाती है,
दिलों को दिलों से मिलाती है।
प्राचीन सभ्यता का
आधुनिक युग में
तालमेल बखूबी बिठाती है।
स्वतंत्रता संग्राम में
देशभक्ति का संदेश
हर घर तक पहुँचाती है।
साहित्यकारों की कलम में
बनकर विचार बसती है,
समाज सुधार का मार्ग दिखाती,
राष्ट्र प्रेम का पाठ पढ़ाती है।
मेरी मातृभाषा, मेरे जीवन में,
मुख्य भूमिका निभाती है।
भाषा नहीं,
एकता की मिसाल,
हिंदी मेरी कहलाती है।
राष्ट्र निर्माण में
अहम भूमिका निभाती है।
गर्व से कहता हूँ—
मैं हिंदी भाषी हूँ,
राष्ट्र की आत्मा,
हिंदी मेरी कहलाती है।
– गौरव बघेल
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