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जकड़ा आजाद भारत

                
                                                         
                            जकड़ा आज़ाद भारत
                                                                 
                            

मैं आज का भारत हूँ।

पाठशालाओं पर लटके ताले,
मधुशालाओं में बढ़ी लगी कतारें,
धंधे में होता अंधा भारत,
मैं आज का भारत हूँ।

स्वास्थ्य के दर पर सिर पीटता,
भ्रष्ट ऑफिसर के हाथ जोड़ता,
महँगाई के बाज़ार में बेरोज़गार भारत,
मैं आज का भारत हूँ।

लूट, हत्याएँ, रेप, कानून-व्यवस्था,
सड़कों में गड्ढे, भरता पानी,
गंदगी की कीचड़ में फँसता भारत,
मैं आज का भारत हूँ।

जात-पात, हिंदू-मुस्लिम,
अनगिनत आतंकी हमले,
काँप उठीं हसीन वादियाँ,
लहू से लथपथ रोता भारत,
मैं आज का भारत हूँ।

विश्व पटल पर विज्ञान हमारा,
चंद्रमा पर पहुँचा भारत,
अंतरिक्ष पर ध्वजा फहराया,
किसान आंदोलन लड़ता भारत,
मैं आज का भारत हूँ।

मैं चीखता भारत हूँ,
मैं आज का भारत हूँ।
— गौरव बघेल
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10 घंटे पहले

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