ज़िंदगी को खेल और खिलौनों से सजाए रखा,
हमने थोड़ा अपने बचपन को बचाए रखा।
बागी डाकुओं और नेताओं की कहानी में,
जाने क्यों हमने डाकुओं को बचाए रखा।
खेल शतरंज हो और बाज़ी भले शह मात की हो,
हमने कैसे भी करके प्यादों को बचाए रखा।
बिक रहे अलग अलग भावो में यहां जिस्म,
फिर भी हमनें खुदको फिसलने से बचाए रखा।
एक बिल्ली काटे रस्ता और बाईं आंख फड़के,
रोज बस इतनी बदनसीबी को बचाए रखा।
दुःख मेरे अलग अलग सांचो में ढाले हुए,
उनमें मैने सिर्फ तेरे दुःख को बचाएं रखा।
- हेमन्त
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