हौसला रखो....
होती तो जिंदगी एक अनमोल तोहफा है,
पर अफसोस...
लोग यहाँ रोते ज्यादा,हँसते थोड़ा है।
मत तोड़ो इस तोहफे को,
विफलता की डर से।
ज़रा हँस के नजर उठाओ,
राह दिखेगी इधर-उधर से।
चुन के फिर मंजिल की राह,
चलना उस डगर पे।
पग-तल होगी जरुर मंजिल,
न थकना इस सफर पे।
माना, मंजिल नहीं होती आसाँ,
पर मुश्किल भी नहीं है।
कहीं है दरिया,
तो कश्ती भी कहीं है।
देख हौसला तुम्हारे चलने का,
मुश्किल भी शीश झुकायेगा।
तेरे पथ के हर काँटों पर,
खुशियों के फूल बिछायेगा।
फरूण कुमार यादव
जाँजगीर-चाम्पा,छ.ग.
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