हर दर्द की बस एक तुम्हीं मेरी शिफ़ा हो,
तुम रूह-ए-मोहब्बत हो, मेरी जान-ए-वफ़ा हो।"
"देखो ज़रा किस बात पे हँसती हैं शगुफ़्तें,
हमसाया हूँ हमसाए से न शर्मो हया हो।"
होने दे अगर होता है इस दिल को मलामत,
मैं फिर भी कहूँगा, कभी तेरा न बुरा हो।
महका दे चमनज़ार को ए यार मेरे फिर,
खुशबू रहे कायम न वो फूलों से जुदा हो,,
सज्जाद तुझे क्या पता क्या होती रिहाई,
जानेगा वही जो कभी आजाद किया हो,,
मिलती है तिरी दुनिया में अफ़्लाक ओ ज़मीं भी
,अब जो भी मेरे यार वफ़ाओं का सिला हो।
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