दोस्त नकली मिले हर मुलाकात में...
बोलते झूठ हर दम हर एक बात में ...
दौर कैसा है ये आजकल राम जी ....
भाई भाई न रह पा रहे साथ में.....।।
चेहरे अपने मिले हर मुलाकात में,
किंतु खंजर छिपाए थे हर हाथ में।
दौर कैसा है ये आजकल राम जी,
अपना साया नहीं चल रहा साथ में।।
रिश्ते मतलब के साँचे में ढलने लगे,
स्वार्थ,कटुता,कलह मन में पलने लगे।
दौर कैसा है ये आजकल राम जी,
लोग अपने ही अपनों को छलने लगे।।
लोग दौलत के पीछे भटकने लगे,
पंख अपनों से अपनों के कटने लगे।
दौर कैसा है ये आजकल राम जी,
घर की दहलीज और द्वार ब॔टने लगे।।
माँ की ममता भी व्यापार लगने लगी,
बाप की सीख भी बेकार लगने लगी।
दौर कैसा है ये आजकल राम जी,
पूरी दुनिया ये बाजार लगने लगी।।
झूठ की जीत है सच परेशान है
दांव पर क्यों लगा आज ईमान है।
दौर कैसा है ये आजकल राम जी,
झूठ के हांथ सच का गिरेबान है।।
फिर से इंसानियत का उजाला करो,
हर हृदय को दया का शिवाला करो।
दौर बदलो करो अब कृपा राम जी,
अपने भक्तों को भव से निकाला करो।।
- विनय दुबे
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