मन में फिर इक सवाल आया,
उसी रात में तुम्हारा खयाल आया.... 1
वहि खयालो से उलझते हुए,
दिल में एक सैलाब उमढ आया.....2
इन्ही सैलाबों को पार करते हुए,
तुम्हारे प्रति प्रेम भाव का किनारा नजर आया....3
सुना है कि तुम 'कविता' हो !
इसीका मतलब ढूंढते हुए मन मे कुछ नजर आया...4
तुम हो कविता हो जज्बातों कि,
तुम हो कविता हो ख़्वाबों कि,
तुम हो कविता हो आसमानों कि.......5
आखिर में तो यह निष्कर्ष सामने आया,
तुम तो हो मेरी कविता कागज के पन्नो पर सिहाई से प्रकट होती,
मेरे शब्दरुपी भावनाओ कि ....मेरी 'कविता'...
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