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बताओ नहीं, सीखने दो

                
                                                         
                            बताओ नहीं, सीखने दो
                                                                 
                            

माँ पंछी चूजों को पंख पकड़कर उड़ना नहीं सिखाती
न कोयल अपने नन्हीं को कुहू कुहू करना सिखाती
न ही शेरनी अपने बच्चों को शिकार करना सिखाती
गिर गिर कर, उठ उठ कर, समय उन्हें है सिखाती।

उन्मुक्त छोड़ जाएं हम बच्चों को, समय समय पर
गुत्थियों को सुलझाने दें खुद उलझ उलझ कर
गांठों को खोलने दें स्वयं, प्रयास परिश्रम कर
अनेक परतें हटेंगी, अनेक पर्दे खुलेंगे, रह रह कर।

थोड़ी स्थान बना देना, थोड़ी राह दर्शा देना
कुछ समस्याएं खड़ी कर, कुछ औजार दे देना
थोड़ी उत्साह जगा देना, थोड़ी आजादी दे देना
हल निकलता नज़र आए, थोड़ी पीठ थप थपा देना।

कहना नहीं, यह न करो, दिखाना नहीं, ऐसा करो
समझाना नहीं, यह जानो, सुनाना नहीं यह याद करो
इसे बनाओ, उसे खोलो, इन्हें जोड़ो, इसे चलाकर समझों
उसे देखकर आओ, पूछो क्यों ऐसा है, जानो है क्यों।

चुनो न ऐसी दीवारें, बनाओ न ऐसी रूप रेखा बंद
दीवारों को अभेद न समझे, सीमाओं को न अंत
प्रत्येक पाठ हो सीढ़ी, एक और मंजिल का प्रारंभ
प्रत्येक समझ हो द्वार, एक और विस्मय का आरम्भ।

उन्हें प्रश्न ऐसी देना कि उत्तर से उभर आए अनेक प्रश्न
उन्हें कार्य ऐसी सौंपना कि, करने से निकल आए नए प्रश्न
उन्हें आजादी इतनी देना कि, तुम्हारे उत्तर का ही करे प्रश्न
उन्हें उत्साह इतनी देना कि, सीखने का मनाये जश्न।
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21 घंटे पहले

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