रिश्तों की आपाधापी में, प्रेम की डोर छूट न जाए।
बदलते चेहरों की दुनिया में, भरोसा किसी का टूट न जाए।
साथ गर ना कोई हो, निर्भीक बन जिया जाए।
मजबूत बन इतना, अहसान ना कोई दिखलाए।
अंधे बहरो की बस्ती में,कोई कही खो न जाए।
अपनापन जताकर, सम्मान किसी का लूट ना पाए।
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