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मर्दानी की वाणी

                
                                                         
                            क्या सोच रहे मन कपट फिरंगी
                                                                 
                            
झांसी ताज हड़प लोगे।
तुम अपना तख्ता फहराने को
भारत मां को ठग लोगे।।

नही ज्ञान तुम्हे इस माटी का
हर कोख से जन्मे वीर यहां ।
बलिदानी यहां सींची खून से
मरने का यहां खोफ कहां।।

मैं झांसी अपनी नही दूंगी
ये मर्दानी की वाणी है ।
तलवार , कटारी शोर करे
गोरों को मुंह की खानी है ।।

रक्त का आखिर कतरा मेरा
इस माटी मे मिल जाएगा ।
जो ये लक्ष्मी चली गई
नव फूल वहां खिल जाएगा ।।

तेरे ये निशान मिटाने को
फिर वही युद्ध और रण होगा ।
क्रांति की आग जलाने को
फिर फिर कोई सिंह जन्म होगा ।।
फिर फिर कोई सिंह जन्म होगा।।
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2 वर्ष पहले

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