आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भाई सै दुनिया की छाँव

                
                                                         
                            भाई सै दुनिया की छाँव रे भाई,
                                                                 
                            
भाई सै भगवान,
भाई बिना सूना लागे,
जीवन अरु जहान।।

बचपन तै खेले सँग मेरे,
झगड़ा भी कर जावे,
पर बहन की आँखन में आँसू,
देखे रह ना पावे।।

छोटी-छोटी बातन में,
प्यार दिखावे भाई,
उसकी कदमों सै घर में
खुशियां सावन सी घिर आई।।

मेले-ठेले हो या ठाठ ब्याह,
सब में आगे आवे,
हर काम सुहावन लागे मौकों,
जब भाई मुस्कावे।।

कठिन घड़ी में साथ निभावे,
मेरी हिम्मत बढ़ावे भाई,
भगवान तै माँगू यही दुआ,
रहे सदा भाई मेरा सुखदाई।।

भाई सै जीवन की आस रे,
भाई सै सम्मान,
भाई सै दुनिया की छाँव रे,
भाई सै भगवान।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर