गर्व से खुद को कॉकरोच कहना,कैसी यह नादानी हैं
शहीदों के बलिदानों की, क्या यही बची निशानी हैं
ग़ुलामी की ओर ना कदम रखों,अस्तित्व वतन का मिट जायेगा
ना कोई गाँधी ना कोई सुभाष,ना भगत सिंह अब आएगा
जागो रे... भारत जगो अब,खुद ही हमें संभलना होगा
नफ़रत की दीवारों से अब,आगे हमें निकलना होगा
हम आपस में ही लड़-लड़ कर,पावन धरा को तोड़ रहे
एकता की डोर तोड़कर,हम नफ़रत से नाता जोड़ रहे
चीन-अमेरिका दुनियाँ में,नित नए आविष्कार हैं कर रहे
और एक हम हैं जो फिर से,पाषाण युग की ओर चल रहे
जाति धर्म के झगड़े से,देश हमारा रोता हैं
जब भाई से भाई लड़ता हैं,तब स्वाभिमान देश खोता हैं
जागो रे... भारत जागो अब,नफ़रत को हमें तजना होगा
एकता की पावन अग्नि में कुन्दन की तरह तपना होगा
जो शेर थे कल तक भारत के,वो आज बने हैं क्यों कायर
शहादत का जज़्बा भूल गए,ओढ़कर कायरता की चादर
ना बापू जैसा साहस हैं, ना सिंहों जैसा लहू उबलता
अंधविश्वास के साए में,आज का युवा क्यों हैं ढलता
जागो रे... भारत जागो अब,शेर की तरह फिर बनना होगा
कायरता का फाड़कर पर्दा,बस आगे ही हमें बढ़ना होगा
छोड़कर अंधविश्वास की बातें,विज्ञान की राह को अपनाओं
कर्मयोगी बनकर अब,भारत को समृद्ध बनाओं
तर्क और विज्ञान की शक्ति से,अंधकार मिटाना होगा
बचाना हैं ग़र वतन को अपने,तो कदम से कदम मिलाना होगा
अब न कोई आएगा मसीहा,किस्मत खुद अपनी लिखनी होगी
कदम से कदम बढ़ाने की,सोच हमें यही अब रखनी होगी
जागो रे...भारत जगो अब,एक नया इतिहास गढ़ो
हाथों में लेकर हाथ,तरक्की की राह में आगे बढ़ो
ग़ुलामी की ओर ना कदम रखों,अस्तित्व वतन का मिट जायेगा,
ना कोई गाँधी ना कोई सुभाष,ना भगत सिंह अब आएगा
गर्व से खुद को कॉकरोच कहना,कैसी यह नादानी हैं
शहीदों के बलिदानों की, क्या यही बची निशानी हैं
देश को ग़र बचाना हैं तो,सच्चा एक किरदार बनो
गाँधी और भगत सिंह जैसे,सच्चे तुम अवतार बनो
-महेश यादव
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