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इंसान ही इंसान का दुश्मन

                
                                                         
                            इंसान से बड़ा इंसान का अना हुआ
                                                                 
                            
इंसान ही इंसान का दुश्मन बना हुआ

नफ़रत की जंजीरों को तोड़े कौन यहाँ
हर कोई अपनी ही जिद में तना हुआ

खून के रिश्ते भी आजकल बेमानी हो गये
खून का रिश्ता है खून से सना हुआ

आसपास हैं जो उनसे कोई राब्ता नहीं
अजनबी हैं लोग जो उनसे आशना हुआ

मोहब्बत की चाँदनी धुँधलाती ही जा रही
अहल-ए- रंजिशों का अँधेरा घना हुआ
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4 घंटे पहले

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