मुस्कुरा कर तू देख ले इक बार
मेरे दिल की हर इक चुभन जाए
दूरियाँ जब भी दरमियाँ आएँ
कारगर इश्क़ की लगन जाए
धूप जब मेरे सर पे हो ग़म की
तेरी यादों से छाँव बन जाए
अपने रूठे हुए सनम को मैं
जब मनाऊं तो 'शाद ' मन जाए
- फ़ौज़िया नसीम शाद
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