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हमपे किस-किस का कब उधार रहा

                
                                                         
                            दिल पे कब मेरा इख़्तियार रहा
                                                                 
                            
दिल हमेशा ही बेक़रार रहा

शिद्दतों में जो बे'शुमार रहा
मेरी आंखों का इंतिज़ार रहा

वो हमें भूल ही नहीं सकता
दिल से हमको ये ऐतबार रहा

ज़िन्दगी इतना बस बता दे हमें
हमपे किस-किस का कब उधार रहा

बेबसी ज़िन्दग़ी में शामिल है
मेरा दामन भी तार - तार रहा
- फौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
22 घंटे पहले

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