जब भी लगता है भूल जाऊंगी
मैं तुझे पढ़ के देख लेती हूं
- फ़ौज़िया नसीम शाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X